रविवार, 20 नवंबर 2011

खतों में

अपने खतों में रखना तुम,
कुछ पीलापन सरसों का.

कुछ बूँदें हाल के सावन की,
कुछ खिलखिलाहट आस-पास खेलते बच्चों की.

रखना हल्की लाली सिन्दूर की भी,
और चेहरे की कुछ लकीरें.






4 टिप्‍पणियां:

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

सुन्दर अभिव्यक्ति

डॉ. नूतन डिमरी गैरोला- नीति ने कहा…

बड़ी सुन्दर अभिव्यक्ति

संजय भास्कर ने कहा…

...बहुत सार्थक..सुन्दर और सशक्त प्रस्तुति..

Parul ने कहा…

kuch adhurapan sa hai....!

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