सोमवार, 12 सितंबर 2011

नाम मेरा

उन घांस पे बिछी रातों में,
कैसे लेतीं थीं
तुम नाम मेरा

जैसे राज़
हो वो कोई.

2 टिप्‍पणियां:

संजय भास्कर ने कहा…

गहरी पंक्तियाँ सीधी हृदय में उतर गयीं।

Parul ने कहा…

ye kya keh diya.............. :)

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