शुक्रवार, 11 फ़रवरी 2011

खूबसूरत नहीं

तुम्हारे पास हूँ,
तुम्हें छू सकती हूँ,
पर ये उतना खूबसूरत नहीं;
जितना खूबसूरत

तुम्हें पाने का ख्वाब था.


6 टिप्‍पणियां:

वन्दना ने कहा…

वाह! क्या ख्वाब है।

Er. सत्यम शिवम ने कहा…

आपकी उम्दा प्रस्तुति कल शनिवार (12.02.2011) को "चर्चा मंच" पर प्रस्तुत की गयी है।आप आये और आकर अपने विचारों से हमे अवगत कराये......"ॐ साई राम" at http://charchamanch.uchcharan.com/
चर्चाकार:Er. सत्यम शिवम (शनिवासरीय चर्चा)

Mithilesh dubey ने कहा…

वाह सुंदर अभिव्यक्ति ।

Dr Varsha Singh ने कहा…

सुन्दर प्रस्तुति..

Dr (Miss) Sharad Singh ने कहा…

एक-एक शब्द भावपूर्ण ..... बहुत सुन्दर...

: केवल राम : ने कहा…

पंक्तियाँ बेशक कम हैं ..लेकिन अर्थ इतना गहरा है की जिन्दगी भर सोचा जा सकता है ....

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