शनिवार, 2 अक्तूबर 2010

लोग क्या याद रखते हैं ?



लोग क्या याद रखते हैं ?

एक अजनबी जगह पर
कुछ नरमी भरे
अजनबी एहसास !

या एक रोज़ कि वो
भूख जो आप को
सेंक सेंक के खा रही थी !

या एक पहाड़ की
सांसें जो अन्दर भरी
थीं तो लगा था
जिंदगी का पता !

या फिर एक साथ ,
जो कभी आप में सिल
जाता है या कभी उधड़ !
पर जानते हो ये भी -
वो था,
वो है ,
और वो रहेगा सदा !

1 टिप्पणी:

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

या एक रोज़ कि वो
भूख जो आप को
सेंक सेंक के खा रही थी !

बहुत खूब ..

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