शुक्रवार, 8 अक्तूबर 2010

सख्त जांच


सब जगह
शोर है ,
संदेह है .
मन के अन्दर
ही अन्दर
कई तूफ़ान हैं ,
एक इस्तीफे के
मांग है  .

पर बिल्ला  तो
साफ़ कहता है,
मलाई का कटोरा
नहीं छोडूंगा !
इस्तीफा ! नहीं नहीं
वो तो नहीं दूंगा .

एक काम हो
सकता है ,
कार्यवाही होगी ,
इस सबके के पीछे
सख्त जांच होगी .

जांच ? सख्त ?
ये तो वही है ना
जो ढीले लोग करते
हैं , उबासियाँ भरते हुए.
वो ख़त्म हो जाते हैं ,
पर ये जांच ..ये
ख़त्म नहीं होतीं .

सख्त जो ठहरीं !

11 टिप्‍पणियां:

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

बहुत सटीक लिखा है ....




चर्चा मंच के साप्ताहिक काव्य मंच पर आपकी रचना 12 -10 - 2010 मंगलवार को ली गयी है ...
कृपया अपनी प्रतिक्रिया दे कर अपने सुझावों से अवगत कराएँ ...शुक्रिया

http://charchamanch.blogspot.com/

Parul ने कहा…

remarkable !

ana ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति………

M VERMA ने कहा…

बेहतरीन

वन्दना ने कहा…

सही कहा।

अनामिका की सदायें ...... ने कहा…

बढ़िया तीक्षण प्रहार.

Udan Tashtari ने कहा…

एक सटीक रचना.

Kiran Wadivkar ने कहा…

अच्छी कविता है .

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

एक बार यहाँ भी देखें ...

http://charchamanch.blogspot.com/2010/10/20-304.html

Dorothy ने कहा…

प्रासंगिक और सटीक अभिव्यक्ति. आभार.
सादर
डोरोथी.

Anupam karn ने कहा…

बढ़िया व्यंग्य !

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