शुक्रवार, 8 अक्तूबर 2010

नाज़ुकी से


आखिर तुम
ही बताओ -
कैसे रखा करूँ
अपनी बात ?

नाज़ुकी से !

नाज़ुकी से ??

हाँ वैसे ही जैसे
"एदगर देगा" के
चित्रों में
बैले नर्तकियां
अपने अंगूठे
से छूती हैं
एक छोटे
धरती के
कोने को

उतनी नाज़ुकी से !
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