बुधवार, 28 अप्रैल 2010

आज फुर्सत है


आज फुर्सत है
और कुछ काम नहीं .
दिन खाली है
 बजता है , खटकता है .

फुर्सत की मुझे  हसरत है ,
पर उसका मिल जाना ये
बेहतर अंजाम नहीं ..

मुझे वही पसंद है ,
कि दोनों हाथ में मसरूफियत
कि मंझीरे ..
जिन्हें खनकाती रहूँ ..
ख़ामोशी पर
 अपनी आवाज़ से
कुछ लिखती रहूँ ..

फुर्सत की मुझे  हसरत है ,
पर उसका मिल जाना
ये बेहतर अंजाम नहीं !

2 टिप्‍पणियां:

RITAMVARA ने कहा…

फुर्सत की मुझे हसरत है ,
पर उसका मिल जाना ये
बेहतर अंजाम नहीं ...wah wah..
some lines from my pen in relevancy...
The cold cold corner...(फुर्सत)
What fills it in eternity.(2nd line)
Is my love for it...(3rd line but slightly changed).:)

intihaa ने कहा…

:)

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